SET 2026 History Paper Solution: हल एवं स्रोत सहित | NCERT + IGNOU Reference | Hindi & English
SET 2026 History: हल एवं स्रोत सहित प्रश्न-पत्र
हर प्रश्न का उत्तर, कथन-वार विश्लेषण और प्रामाणिक स्रोत (NCERT section और IGNOU unit) के साथ। Hindi + English।
निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
b. महात्मा बुद्ध आत्मा के अस्तित्व को ही कर्मों की प्रेरक शक्ति मानते थे।
c. आजीवक नियति की अटलता में विश्वास करते थे।
Which of the following statement/s is/are correct?
a. The process of stopping new Karma is known as "Nirjara" in Jainism.
b. Mahatma Buddha regarded the existence of the soul as the driving force behind actions.
c. Ajivikas believed in the abiding nature of destiny.
- (1) केवल c / Only c
- (2) a एवं c / a and c
- (3) b एवं c / b and c
- (4) केवल a / Only a
हल और स्रोत देखें
कथन-वार विस्तृत हल
कथन a: ❌ गलत
जैन दर्शन में कर्म-बंधन और मुक्ति की प्रक्रिया क्रमबद्ध है। जीव (आत्मा) की ओर कर्म-पुद्गलों का आना आस्रव है और उनका आत्मा से चिपकना बंध। मुक्ति दो चरणों में होती है: पहले सही ज्ञान और आत्म-संयम से नये कर्मों का आना रुकता है, इसे संवर कहते हैं; फिर पहले से जुड़े कर्म झड़ते हैं, इसे निर्जरा कहते हैं, जो तप से तेज़ होती है। इसके बाद मोक्ष। प्रश्न में "नये कर्मों को रोकने" की प्रक्रिया को निर्जरा कहा गया है, जबकि वह संवर है। इसलिए कथन गलत है।
| क्रम | तत्व | अर्थ | उदाहरण (नाव) |
|---|---|---|---|
| 1 | आस्रव | कर्म-पुद्गलों का आत्मा की ओर आना | नाव में छेद से पानी आना |
| 2 | बंध | कर्मों का आत्मा से चिपकना | नाव में पानी भरना |
| 3 | संवर | नये कर्मों का आना रोकना | छेद बंद करना |
| 4 | निर्जरा | पुराने, संचित कर्मों का झड़ना | भरा पानी बाहर निकालना |
| 5 | मोक्ष | कर्म से पूर्ण मुक्ति | नाव का किनारे पहुँचना |
कथन b: ❌ गलत
बुद्ध के अनुसार संसार अनित्य (anicca) है और अनत्ता (anatta), यानी आत्मा-रहित, क्योंकि इसमें कुछ भी स्थायी या शाश्वत नहीं है। जो दर्शन स्थायी आत्मा को ही नहीं मानता, वह आत्मा को "कर्मों की प्रेरक शक्ति" नहीं मान सकता। बौद्ध मत में दुःख का कारण तृष्णा (इच्छा) है। इसके विपरीत जैन दर्शन स्थायी जीव (आत्मा) को मानता है, इसलिए दोनों को आपस में न मिलाएँ।
कथन c: ✅ सही
आजीवक संप्रदाय के प्रमुख शिक्षक मक्खलि गोसाल ने मगध के राजा अजातशत्रु से कहा था कि न ज्ञानी अपने सद्गुणों से, न मूर्ख अपने प्रयास से कर्म को घटा-बढ़ा सकता है; सुख-दुःख मानो नाप-तौल कर दिए गए हैं। जैसे फेंका गया धागे का गोला पूरा खुलकर ही रुकता है, वैसे ही सबका मार्ग पहले से तय है। इसीलिए आजीवकों को नियतिवादी (fatalists) कहा जाता है।
विकल्पों का निष्कासन (Elimination): a गलत होने से विकल्प (2) और (4) हटे; b गलत होने से (3) हटा। बचा केवल (1) केवल c।
1. NCERT: कथन b और c के लिए
Themes in Indian History, Part I (कक्षा 12), अध्याय 4 "Thinkers, Beliefs and Buildings" (विचारक, विश्वास और इमारतें), 2022-23 संस्करण
• कथन c: Section 2 "The Background: Sacrifices and Debates", Source 3 (मक्खलि गोसाल, आजीवक = fatalists)
• कथन b: Section 5 "The Teachings of the Buddha" (anicca, anatta)
• कथन a से संबंधित: Section 3 "Beyond Worldly Pleasures: The Message of Mahavira" (यहाँ केवल कर्म-चक्र और तप का उल्लेख है; संवर/निर्जरा शब्द नहीं)
NCERT PDF देखें
2. IGNOU: कथन a के लिए (सीधी परिभाषा)
• IGNOU Unit 2 "Jainism", Section 2.8 "Practical Teachings of Jainism", पृष्ठ 11: नव-तत्व; संवर = नये कर्म का रुकना, निर्जरा = संचित कर्म का झड़ना। eGyanKosh
• IGNOU Unit 16 "Jainism and Buddhism" (Religious Pluralism), Section 16.4 "Doctrine of Jainism", पृष्ठ 46: सात तत्वों की सूची, जिसमें संवर (कर्म-प्रवाह की रोक) और निर्जरा (संचित कर्म का निष्कासन)। eGyanKosh
3. IGNOU: कथन b की पुष्टि
• IGNOU Unit 16, Section 16.7 "Doctrine of Buddhism", पृष्ठ 48: अस्तित्व अनित्य (anitya) और आत्मा-रहित (anatman) है।
— Kuldeep Singh Rathore, PGT History
History by Rathore Sir
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